श्री चामुण्डा माता की आरती

पहली आरती

ॐ जय चामुण्डा माता मैया जय चामुण्डा माता

शरण आए जो तेरे सब कुछ पा जाता॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

चण्ड-मुण्ड दो राक्षस हुए हैं बलशाली

उनको तुमने मारा क्रोध दृष्टि डाली॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

चौंसठ योगिनी आकर तांडव नृत्य करें

बावन भैरव झूमे विपदा आन हरे॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

शक्ति धाम कहलाती पीछे शिव मंदिर

ब्रह्मा, विष्णु, नारद मंत्र जपें अंदर॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

सिंहराज यहाँ रहते घंटा ध्वनि बाजे

निर्मल धारा जल की वंडेर नदी साजे॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

क्रोध रूप में खप्पर खाली नहीं रहता

शांत रूप जो ध्यावे आनंद भर देता॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

हनुमत बाला योगी ठाढ़े बलशाली

कारज पूरण करती दुर्गा महाकाली॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

रिद्धि-सिद्धि देकर जन के पाप हरे

शरणागत जो होता आनंद राज्य करे॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

शुभ गुण मंदिर वाली ‘ॐ’ कृपा कीजै

दुख जीवन के संकट आकर हर लीजै॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

ॐ जय चामुण्डा माता मैया जय चामुण्डा माता

शरण आए जो तेरे सब कुछ पा जाता॥

॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

॥ इति चामुण्डा माता आरती संपूर्णम्॥

दूसरी आरती

जय जय चामुण्डा चण्ड-मुण्ड सँहारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

जय महिषासुर के मान भंग कर डाले

जय शुम्भ-निशुम्भ से बड़े निशाचर मारे॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

जय मधु-कैटभ और रक्त बीज संहारे

जय धूम्रकेतु से पापी दुष्ट पठारे॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

तेरा यह सारा विश्व ऋणी है भारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

जय जय चामुण्डा चण्ड-मुण्ड सँहारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

इस जग में ज्योति राज रही माँ तेरी

मंदिर में प्रतिमा साज रही माँ तेरी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

घर घर में जय जय गूंज रही माँ तेरी

मन मन में मुरलिया बाज रही माँ तेरी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

तेरा गुण गाते माँ हर्ष हर्ष नर नारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

तेरा जो करता श्रद्धा से नित दर्शन

तेरा जो करता भक्ति भाव से पूजन॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

नतमस्तक हो कर करता जो अर्चन

छंट जाते उसके जन्म जन्म के बंधन॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

यह अनुभव कह लिख गए लोग हितकारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

यह सुन करके माँ तेरी शरण में आया

और भक्ति भाव से पुष्प बूट कर लाया॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

निर्धन के अंगीकार करो यह माया

इससे अच्छा उपहार न घर में पाया॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

पलवारी दे सब ढूंढे अठा अठारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी

जय जय चामुण्डा चण्ड-मुण्ड सँहारी

जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी॥

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