नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का महान उत्सव है। यह वह दिव्य अवसर है जब भक्त माँ दुर्गा के नव रूपों की आराधना के माध्यम से अपने जीवन में ऊर्जा, उत्साह और आध्यात्मिक उत्थान का संचार करते हैं। यह पर्व हर घर में मंगल, शांति और सिद्धि का प्रवेश कराता है, यदि इसे श्रद्धा और विधिपूर्वक किया जाए।
नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से होती है, जिसे शुभ मुहूर्त में विधिवत् सम्पन्न करना अत्यंत आवश्यक होता है। नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, व्रत, जप, पाठ और हवन किया जाता है।
कलश स्थापना (घटस्थापना)
कलश स्थापना के लिए एक तांबे, पीतल या मिट्टी के पात्र में शुद्ध जल भरें, आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखें। कलश के समीप मिट्टी में जौ बोएं। यह कलश माँ दुर्गा की दिव्य उपस्थिति और समृद्धि का प्रतीक होता है।
नित्य पूजा विधि
- प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- दीप प्रज्ज्वलन: माँ के समक्ष घी या तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- आवाहन: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र से माँ का ध्यान कर उनका आवाहन करें।
- पुष्प अर्पण: लाल पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन व सिंदूर अर्पित करें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ: कवच, अर्गला, कीलक तथा अध्यायों का पाठ श्रद्धा से करें।
- आरती: “जय अम्बे गौरी” अथवा “दुर्गा जी की आरती” गाएं।
- भोग: हलवा, पूड़ी, काले चने, नारियल या फल माँ को अर्पण करें।
अष्टमी / नवमी विशेष पूजा
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर हवन, कुमारी पूजन और ब्राह्मण भोज विशेष पुण्यदायक माने जाते हैं।
- हवन: घृत, गुग्गुल, नवग्रह समिधा, दुर्गा मंत्रों द्वारा आहुति दें।
- कन्या पूजन: 9 कन्याओं को माँ के स्वरूप में पूजें, उन्हें भोजन कराएं, उपहार और दक्षिणा दें।
- ब्राह्मण भोजन: योग्य ब्राह्मणों को आमंत्रित कर भोजन कराएं और आशीर्वाद प्राप्त करें।
उपवास नियम
यदि पूरे नौ दिन उपवास संभव न हो तो प्रथम, अष्टमी और नवमी
पूजन में आवश्यक बातें
- माँ दुर्गा को लाल रंग
- “श्री दुर्गा सप्तशती” या “श्रीमद् देवी भागवत” का पाठ करें। संभव न हो तो कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करें।
- पूजा के अंत में क्षमा याचना करें — अपरााधसहस्राणि… श्लोक द्वारा।
यह पर्व हमें माँ आदिशक्ति से जुड़ने का अवसर देता है। जो श्रद्धा से इस विधि का पालन करता है, उसे जीवन में सफलता, सुख, संतुलन और सुरक्षा प्राप्त होती है। आइए, इस नवरात्रि पर तन, मन और आत्मा से माँ दुर्गा की आराधना करें और उनके अनंत अनुग्रह को अपने जीवन में अनुभव करें। यही है नवरात्रि व्रत का परम उद्देश्य — शक्ति का जागरण, भक्ति का विस्तार और जीवन में दिव्यता का प्रवेश।